शरद पवार पर एफआईआर, चुनावी राजनीति या भष्ट्राचार पर वार

महाराष्ट्र में चुनावी मौसम के बीच शरद पवार पर घोटाले के आरोप को लेकर माहौल गर्म है  साल 2007 से 2011 के बीच हुए इस घोटाले में पूर्व मुख्‍यमंत्री और नेशनलिस्‍ट कांग्रेस पार्टी (NCP) अध्‍यक्ष शरद पवार, उनके भतीजे और पूर्व डिप्‍टी सीएम अजित पवार समेत कई नेताओं और अधिकारियों पर FIR हुई है. पुलिस की FIR के मुताबिक, महाराष्‍ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाला से 1 जनवरी, 2007 से 31 दिसंबर, 2017 के बीच MSCB घोटाले से सरकारी खजाने को 25,000 करोड़ रुपये की चपत लगी.


क्योंकि चुनाव से पहले एक्शन हुआ है, इसलिए जांच की आंच में राजनीतिक दखल का भी शक जताया जा रहा है! शरद पवार एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से आज तक किसी भी भ्रष्टाचार के मामले में नाम नहीं लिया था। वह देश के सबसे चतुर राजनेता है। 


महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में 25 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाला मामले में आरोपित किये गये शरद पवार को लेकर आज तब राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला जब पवार अड़ गये कि वह प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होंगे और प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें ईमेल भेजकर कहा कि अभी आपको आने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन पवार तो पवार हैं, दशकों तक पावर में रहे हैं, अच्छी तरह जानते और समझते हैं कि उनके हर कदम, उनके हर बयान और उनकी हर मुलाकात का महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों पर क्या असर पड़ सकता है। इसलिए जब ईडी ने पवार और उनके भतीजे अजीत पवार के खिलाफ मामला दर्ज किया तो ऐन चुनावों के समय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी मुश्किलों में पड़ गयी।